भगवान शिव व माता पार्वती के विवाह स्थल को लेकर आजकल ये खास चर्चाएं… जानिए…

-तीर्थ पुरोहित समिति त्रियुगीनारायण के अध्यक्ष के आरोप- हक हकूकधारियों के अधिकार पर डाला जा रहा डाका 

-कहा, स्थानीय हक हकूकधारियों के हक छीनने का प्रयास कर रही बदरी केदारनाथ मंदिर समिति  

-बीकेटीसी की घोषणा के खिलाफ तीर्थ पुरोहित समिति त्रियुगीनारायण की आंदोलन की चेतावनी

देहरादून, श्री बदरीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) की ओर से शिव व पार्वती के पवित्र विवाह स्थल त्रियुगीनारायण मंदिर में विवाह के लिए पंजीकरण किए जाने की घोषणा की है. लेकिन अब इसको लेकर घमासान होने के आसार नजर आ रहे हैं. त्रियुगीनारायण मंदिर के तीर्थपुरोहितों ने इसका विरोध किया है. बीकेटीसी पर तीर्थपुरोहितों के हकहकूक के साथ छेड़छाड़ का आरोप लगाया है. तीर्थपुरोहितों ने इस घोषणा के खिलाफ आंदोलन की चेतावनी भी दी है.

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा समाचार 

तीर्थ पुरोहित समिति त्रियुगीनारायण के अध्यक्ष सच्चिदानंद पंचपुरी ने प्रेस को जारी बयान में कहा कि सोशल मीडिया में खबर प्रसारित हो रही है कि त्रियुगीनारायण मंदिर में विवाह के लिए श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति की अनुमति जरूरी लेनी होगी। इसमें मंदिर समिति के वरिष्ठ अधिकारियों की ओर से बयान भी जारी किए गए हैं. सच्चिदानंद पंचपुरी ने कहा कि मंदिर समिति हक हकूकधारियों के हक पर डाका डालने की कोशिश कर रही है। यह मंशा सदियों से चली आ रही है। बीकेटीसी स्थानीय हक हकूकधारियों के हक पर डाका डालने का प्रयास किया जा रहा है.

तीर्थपुरोहितों की चलती है आजीविका 

बकौल, सच्चिदानंद पंचपुरी ने कहा कि अनादि काल से त्रियुगीनारायण मंदिर भगवान शिव व पार्वती का विवाह स्थल होने से यहां पर सात जन्मों के परिणय सूत्रों में बंधने की परंपरा रही है। वर्तमान में बड़ी संख्या में देश के विभिन्न राज्यों से विवाह के लिए युगल यहां पहुंच रहे हैं। त्रियुगीनारायण तीर्थपुरोहित समिति पंजीकरण कर विवाह समारोह करती आ रही है। जिससे तीर्थपुरोहितों को आजीविका भी चलती है। समिति की ओर से गत 2 वर्षों से यहां पर विवाह करने वाले युगल का पूरा विवरण रखा जा रहा है. मंदिर में आदि काल से तीर्थपुरोहित ही विवाह से जुड़े सभी कार्य करते आ रहे हैं. कारणवश, BKTC ने वैवाहिक पंजीकरण का कार्य की अनुमति देने संबंधी कोई निर्णय लिया तो, उसका खुलकर विरोध किया जाएगा.