साइकिलिंग कॉन्क्लेव 2026 में देशभर के साइकिलिंग समुदाय ने लिया संकल्प

आयोजन से आगे बढ़कर साइकिलिंग को संस्कृति बनाने पर जोर, 2027 से स्कूलों और विश्वविद्यालयों में क्लब शुरू करने की तैयारी

देहरादून, 23 अगस्त। देश में साइकिलिंग को केवल फिटनेस और मनोरंजन की गतिविधि तक सीमित न रखते हुए इसे जनभागीदारी, पर्यावरण संरक्षण, स्वस्थ जीवनशैली और शहरी परिवहन की स्थायी संस्कृति का हिस्सा बनाने पर जोर दिया गया। देहरादून में पाहाड़ी पेडलर्स की ओर से आयोजित साइकिलिंग कॉन्क्लेव-2026 में देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे साइकिलिंग समुदाय के प्रतिनिधियों ने साइकिलिंग के विस्तार, आधारभूत सुविधाओं, सड़क सुरक्षा, युवाओं की भागीदारी और भविष्य की दिशा पर व्यापक मंथन किया।

जीएमएस रोड स्थित होटल एफोटेल बाय सयाजी में आयोजित कॉन्क्लेव में करीब 150 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। दिल्ली, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र सहित विभिन्न राज्यों से साइकिलिंग समुदाय के लोग देहरादून पहुंचे। प्रशासन, पुलिस, सेना, पर्यावरण, सामाजिक क्षेत्र और साइकिलिंग से जुड़े प्रतिनिधियों की भागीदारी ने इसे राष्ट्रीय स्तर का संवाद मंच बनाया।

कॉन्क्लेव की खास बात यह रही कि इसमें 87 वर्षीय प्रकाश नगलिया से लेकर सात वर्षीय कैवल्या तक ने हिस्सा लिया। इससे यह संदेश सामने आया कि साइकिलिंग उम्र की सीमा से परे सभी वर्गों को जोड़ने वाली गतिविधि बन रही है।

एक वर्ष में तेजी से बढ़ा देहरादून का साइकिलिंग समुदाय

कॉन्क्लेव में पिछले वर्ष से अब तक देहरादून और उत्तराखंड में साइकिलिंग गतिविधियों में आए बदलावों की समीक्षा की गई। बताया गया कि पिछले एक वर्ष में 100 से अधिक नए लंबी दूरी के साइकिल सवार बीआरएम गतिविधियों से जुड़े, जबकि 30 से अधिक नए नियमित साइकिल सवार समुदाय का हिस्सा बने हैं। पिछले छह महीनों में नए सवारों ने 25 से अधिक नई साइकिलें खरीदीं। इस दौरान देहरादून में चार नए साइकिलिंग समूह भी अस्तित्व में आए। उत्तराखंड में हर महीने लगभग दो से तीन साइकिलिंग आयोजन हो रहे हैं। नियमित जन्मदिन राइड के अलावा साप्ताहिक विरासत और ज्ञान साझा करने वाली राइड भी आयोजित की जा रही हैं। महिलाओं, युवाओं, बच्चों और परिवारों की भागीदारी में भी वृद्धि हुई है।

साइकिलिंग का अगला चरण—आयोजन से संस्कृति तक

कॉन्क्लेव में वक्ताओं ने कहा कि साइकिलिंग के विकास को केवल राइड और आयोजनों की संख्या से नहीं मापा जाना चाहिए। जरूरत इस बात की है कि ऐसा वातावरण तैयार किया जाए, जिसमें कोई व्यक्ति शुरुआती स्तर पर साइकिलिंग शुरू करने के बाद प्रशिक्षण, समुदाय और आयोजनों के माध्यम से नियमित तथा लंबी दूरी की साइकिलिंग तक पहुंच सके।बीआरएम जैसी लंबी दूरी की गतिविधियों में बढ़ती भागीदारी को इसी बदलाव का संकेत माना गया। देश के साइकिल सवार अब पेरिस-ब्रेस्ट-पेरिस और आयरनमैन जैसी अंतरराष्ट्रीय स्तर की चुनौतियों के लिए भी तैयारी कर रहे हैं।

2027 से स्कूलों और विश्वविद्यालयों में साइकिलिंग क्लब

कॉन्क्लेव में वर्ष 2027 से स्कूलों और विश्वविद्यालयों में साइकिलिंग क्लब विकसित करने की योजना को आगे की प्रमुख दिशा के रूप में रखा गया। इसकी शुरुआत देहरादून से कर धीरे-धीरे इसे देश के अन्य शहरों और शिक्षण संस्थानों तक ले जाने की परिकल्पना है।इन क्लबों के माध्यम से विद्यार्थियों को नियमित साइकिल राइड, सड़क सुरक्षा, साइकिल रखरखाव, साइकिलिंग प्रशिक्षण तथा छोटी दूरी के आवागमन में साइकिल के उपयोग से जोड़ा जाएगा। उद्देश्य कम उम्र से साइकिलिंग के प्रति समझ और नियमितता विकसित करना है।इस दिशा में राष्ट्रीय इंडियन मिलिट्री कॉलेज (आरआईएमसी), देहरादून के कैडेटों की साइकिलिंग गतिविधियों को उदाहरण के रूप में रखा गया। आरआईएमसी के कमांडेंट कर्नल राहुल अग्रवाल स्वयं साइकिलिंग करते हैं और कैडेटों के साथ भी साइकिलिंग गतिविधियों में भाग लेते हैं। स्थानीय साइकिलिंग समुदाय और आरआईएमसी के बीच समय-समय पर संयुक्त राइड भी आयोजित होती रही हैं।

साइकिलिंग से जुड़े राष्ट्रीय अभियानों का भी उल्लेख

कॉन्क्लेव में देश में साइकिलिंग को बढ़ावा देने के लिए चल रहे विभिन्न अभियानों और पहलों पर भी चर्चा हुई। फिट इंडिया के संडे ऑन साइकिल जैसे अभियानों के माध्यम से साइकिलिंग को फिटनेस और जनभागीदारी से जोड़ा जा रहा है। वहीं कॉरपोरेट क्षेत्र की भागीदारी भी बढ़ी है। एचसीएल की ओर से चेन्नई, नोएडा, हैदराबाद और बेंगलुरु में साइकिलिंग रेस आयोजित की जा रही हैं।उत्तराखंड में भी सरकारी विभागों की ओर से साइकिल रैलियों और साइकिल आधारित गतिविधियों में वृद्धि हुई है। कर्मचारियों को सप्ताह में एक दिन साइकिल से कार्यालय आने के लिए प्रोत्साहित करने की दिशा में शुरू किए गए ‘नो व्हीकल डे’ जैसे प्रयासों की निरंतरता और प्रभाव पर भी चर्चा हुई।

भैरवी ने कहा—लोग साइकिल पर उतरेंगे तो सरकार को भी करना होगा काम

कॉन्क्लेव में फिट इंडिया मिशन की साइकिलिंग सलाहकार तथा बाइसिकल मेयर नेटवर्क और बायक्स इंडिया फाउंडेशन की मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं निदेशक भैरवी ने राष्ट्रीय स्तर पर साइकिलिंग के विस्तार के अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि साइकिलिंग के लिए सबसे बड़ी जरूरत जनभागीदारी की है। जब आम लोग बड़ी संख्या में साइकिल पर उतरेंगे तो सरकारों पर भी साइकिल सवारों के लिए बेहतर सुविधाएं विकसित करने का दबाव और जिम्मेदारी दोनों बढ़ेंगे।

अनूप नौटियाल ने शहरी यातायात पर जताई चिंता

सामाजिक कार्यकर्ता अनूप नौटियाल ने देहरादून की बढ़ती यातायात समस्या और शहरी चुनौतियों पर विचार रखते हुए कहा कि शहर में यातायात के दबाव को कम करने के लिए वैकल्पिक परिवहन साधनों को बढ़ावा देना जरूरी है। साइकिलिंग को शहर की परिवहन व्यवस्था का हिस्सा बनाने के लिए सुरक्षित और सुविधाजनक वातावरण तैयार करना होगा।

टिहरी में साइकिल सर्किट विकसित करने की तैयारी

टिहरी के अपर जिलाधिकारी शैलेंद्र नेगी ने बताया कि टिहरी के कई छोटे शहरों में साइकिलिंग के लिए स्थान विकसित करने की दिशा में कार्य चल रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इन योजनाओं को जल्द धरातल पर उतारा जाएगा। उन्होंने बताया कि टिहरी को देहरादून से जोड़ने वाले साइकिल सर्किट पर भी काम किया जा रहा है।

विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधियों ने साझा किए अनुभव

कॉन्क्लेव में उत्तराखंड सीबीआई के डीआईजी मनीष वी. सूरती, फिट इंडिया मिशन की साइकिलिंग सलाहकार एवं बाइसिकल मेयर नेटवर्क और बायक्स इंडिया फाउंडेशन की सीईओ एवं निदेशक भैरवी, सामाजिक कार्यकर्ता अनूप नौटियाल, टिहरी के अपर जिलाधिकारी शैलेंद्र नेगी तथा मैती आंदोलन के प्रणेता पद्मश्री कल्याण सिंह रावत, इतिहास कार शीशपाल गुसाईं सहित विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े प्रतिनिधियों ने सहभागिता की।चर्चा में यह बात प्रमुखता से सामने आई कि भारत में साइकिलिंग के विस्तार के लिए केवल अधिक आयोजन करना पर्याप्त नहीं है। इसके लिए स्थानीय साइकिलिंग समुदायों को मजबूत करने, सरकारी एवं निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने, शिक्षण संस्थानों को जोड़ने, सुरक्षित आधारभूत सुविधाएं विकसित करने और नए साइकिल सवारों को लगातार अवसर उपलब्ध कराने की आवश्यकता है।कॉन्क्लेव में यह निष्कर्ष सामने आया कि भारत में साइकिलिंग का अगला चरण केवल साइकिल सवारों की संख्या बढ़ाने का नहीं, बल्कि साइकिलिंग को नई पीढ़ी, समुदायों, शिक्षण संस्थानों और शहरों की जीवनशैली का स्थायी हिस्सा बनाने का होना चाहिए। देहरादून से 2027 में प्रस्तावित स्कूल एवं विश्वविद्यालय साइकिलिंग क्लब इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में सामने आए हैं।कार्यक्रम के लिए मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण का भी सहयोग रहा।

गजेंद्र रमोलासं स्थापक पहाड़ी पेडलर्स