देहरादून: शहर में कूड़ा उठान को लेकर चल रहा मामला लगातार गहराते जा रहा है। मैसर्स सनलाइट कंपनी की ओर से बिना करार आमजन से शुल्क लेने, नगर निगम में शुल्क जमा न कराने व काम करने की एवज में लाखों के बिल लगाने के बाद पार्षदों ने कंपनी एवं निगम प्रशाशन के विरुद्ध विरोध शुरू कर दिया है। इस मामले में भाजपा की पार्षद अमिता सिंह व अजय सिंघल की नगर आयुक्त तक से बहस भी हुई है। इसको लेकर अब निगम प्रशासन ने कूड़ा उठाने वाली कंपनी मैसर्स सनलाइट के बिल पेमेंट पर रोक लगा दी है। निगम का कहना है कि आयुक्त कंपनी के बिल की जांच के बाद ही भुगतान पर निर्णय लिया जाएगा।
दो माह पहले ही अनुबंध
दरअसल, मैसर्स सनलाइट कंपनी वर्तमान में डोर-टू-डोर कूड़ा उठान कार्य कर रही हैं। 69 वार्ड का जिम्मा मैसर्स चेन्नई एमएसडब्लू जबकि 29 वार्डों का जिम्मा मैसर्स सनलाइट व भार्गव कंपनी के पास है। शेष दो वार्ड में पायलेट प्रोजेक्ट के तहत वहीं कूड़ा निस्तारण हो रहा। मैसर्स सनलाइट व भार्गव कंपनी का बीती जनवरी में चयन किया गया था, लेकिन दोनों कंपनी ने बिना अनुबंध वार्डों में न सिर्फ काम शुरू किया, बल्कि कूड़ा उठान शुल्क भी वसूला। निगम ने इनसे अनुबंध दो माह पूर्व अक्टूबर में किया।