दीपावली के मौके पर मिलावटखोरी शुरू, दो हजार लीटर दूध नष्ट कराया, कई सैैंपल लिए
देहरादून, दून में मिलावट वाला दूध, मावा और पनीर कोई नई बात नहीं है। दीपावली के मौके पर एक बार फिर से मिलावटखारी के मामले सामने आने लगे हैं। दूध में मिलावट पकडऩे के लिए खाद्य सुरक्षा विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम बुधवार को अलसुबह मैदान में उतरी। पशुपालन एवं डेयरी विकास विभाग की मदद से आशारोड़ी चेकपोस्ट पर राज्य के बाहर से आ रहे दूध की जांच की गई। तकरीबन 30 पर्सेंट नमूनों में पानी की मात्रा अधिक पाई गई। इस पर टीम ने तकरीबन दो हजार लीटर दूध नष्ट करा वाहन वापस लौटा दिए। वहीं, आगे विधिक कार्रवार्ई के लिए दूध के 10 सैैंपल भी लिए गए हैैं।
दून में रोजाना करीब 3.5 लाख लीटर दूध की खपत होती है। इसमें एक से सवा लाख लीटर दूध उत्तर प्रदेश के सहारनपुर, मुजफ्फरनगर व मेरठ और उत्तराखंड के हरिद्वार जिले से राजधानी दून तक पहुंचता है। इसमें मिलावट का ज्यादा अंदेशा रहता है। इसी को देखते हुए खाद्य सुरक्षा विभाग के जिला अभिहित अधिकारी पीसी जोशी, वरिष्ठ खाद्य सुरक्षा अधिकारी योगेंद्र पांडेय, रमेश सिंह व संजय तिवारी और दुग्ध निरीक्षक एके सिंह व अशोक यादव के नेतृत्व में टीम गठित की गई। मंगलवार को रात करीब एक बजे टीम आशारोड़ी पहुंची। इस दौरान टीम ने बाहर से आने वाले दूध के वाहनों को रोककर जांच शुरू की। फिर क्या था, दूधियों और वाहन चालकों में हड़कंप मच गया।
कई वाहन डाट काली टनल से ही लौट गए
जिला अभिहित अधिकारी ने बताया कि कई दूधिये दूध में बर्फ की सिल्ली रख देते हैं, जो घातक है। इससे दूध की गुणवत्ता कम हो जाती है। साथ ही यह स्वास्थ्य के लिए भी हानिकारक है। बर्फ की आड़ में बासी दूध भी बेच दिया जाता है। बर्फ फैक्ट्री में इस्तेमाल होने वाले पानी की गुणवत्ता बहुत खराब होती है। ऐसे में इस दूध के सेवन से पीलिया, डायरिया, डिसेंट्री और टायफाइड जैसी बीमारियां होने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। ऐसा दूध नष्ट करने के साथ ही दूधियों को चेतावनी दी गई है उन्होंने भविष्य में ऐसा किया तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जायेगी। बताया गया है कि ये अभियान जारी रहेगा। बताया, 6 विक्रेताओं के खिलाफ एडीएम कोर्ट में खाद्य सुरक्षा मानक अधिनियम में वाद भी दायर किए गए हैैं।