देहरादून – 2019 लोकसभा चुनाव में ऐतिहासिक जीत के बाद एक बार फिर केंद्र में एनडीए की सरकार प्रचंड बहुमत से बनने जा रही है, इधर उत्तराखंड में भी बीजेपी ने पाँचों लोकसभा सीट जीतकर परचम लहराते हुए क्लीन स्वीप कर दिया है। बीजेपी ने 2014 के बाद दूसरी बार कांग्रेस का सूपड़ा साफ़ किया। उम्मीद थी की एक या दो सीट कांग्रेस के खाते में जा सकती है लेकिन उत्तराखंड की जनता ने कांग्रेस को सीरे से नकार दिया। 2017 विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने ऐतिहासिक बहुमत लाकर सभी को चौंका दिया। जिसके बाद कई नामों के मंथन के बाद त्रिवेंद्र सिंह रावत के नाम पर मुख्यमंत्री की मुहर लगी।त्रिवेंद्र सिंह रावत शांत और कड़क स्वभाव के लिए जाने जाते हैं। सूबे की कमान सँभालते ही त्रिवेंद्र सिंह रावत ने जीरो टोलेरेंस की सरकार के नारे को बुलंद किया।थराली विधानसभा सीट पर बीजेपी विधायक मगनलाल शाह की मौत के बाद उपचुनाव हुई जिसमे मगन लाल शाह की पत्नी मुन्नी देवी को टिकट दिया गया और उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी जीत राम को 1900 वोट से हराया। मुख्यमंत्री बनने के बाद त्रिवेंद्र सिंह रावत की यह पहली परीक्षा थी जिसमे उन्होंने अपने आप को साबित किया। वर्ष 2018 में उत्तराखंड में निकाय चुनाव हुए जिसमे बीजेपी ने मेयर की 7 सीटों में से पांच पर कब्ज़ा किया और कांग्रेस को पटखनी दी। लगातार चुनावों में सफलता से सीएम त्रिवेंद्र का कद बढ़ता गया। और अपनी ही पार्टी के विरोधियों को भी अपनी सफलता से पटखनी देते रहे। वहीँ ताजा उदाहरण 2019 लोकसभा का चुनाव है उत्तराखंड में लोकसभा की पांच सीट हैं और पांचों सीटों पर बीजेपी प्रत्याशियों ने रिकॉर्डतोड़ जीत हासिल की और इन जीत का सेहरा भी सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत के बांधना लाजमी है।पूरे चुनाव में खूब रैलियां की जिसका नतीजा यह उत्तरखंड की पांच सीट जीतकर आलाकमान को तोहफा दिया। लगातार चुनावों में सफलता पाने के बाद त्रिवेंद्र सिंह रावत के विरोधियों के चेहरे पर शिकन पैदा कर सकती है।