गजब ? जब राजधानी की सड़कों पर महिलाएं गलोबंद, नथ, पहाड़ी टोपी जैसे पारंपरिक पहनावे के साथ राइडिंग पर निकली, मानो देवभूमि की कला संस्कृति जमीं पर उतर आई हो, नजर आया…..

देहरादून में “सायकल्चर –रूट्स विद पैडल्स” शीर्षक से विशेष साइकिल राइड का आयोजन किया.

देहरादून, महिला दिवस पर राजधानी दून की सड़कों पर अलग नजारा था. साइकिल सखी, जो पहाड़ी पैडलर्स की महिला इकाई है, ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर देहरादून में “सायकल्चर –रूट्स विद पैडल्स” शीर्षक से विशेष साइकिल राइड का आयोजन किया. इसके तहत महिलाएं और लड़कियों अपने पारंपरिक वेशभूषा में नजर आए. जिनको दूर से देखने पर एेसा महसूस हुआ कि उत्तराखंड की कला संस्कृति मानो जमीं पर उतर आई हो..

सुबह 7.20 बजे शुरू हुई राइड 

यह राइड सुबह 7:20 बजे आईटीएम कॉलेज से शुरू हुई। राइड का मार्ग बिंदाल पुल होते हुए कनॉट प्लेस तक रहा, जहां से प्रतिभागियों ने यू-टर्न लेकर वापस आईटीएम कॉलेज पहुंचकर राइड का समापन किया। यह राइड सुबह 8:30 बजे समाप्त हुई। इस राइड में लगभग 40 महिला साइकिल सवारों ने भाग लिया। इसमें 7 वर्ष से लेकर 60 वर्ष तक की आयु की महिलाओं और बालिकाओं ने हिस्सा लिया। सभी प्रतिभागियों ने पारंपरिक परिधान में साइकिल चलाई, जिनमें साड़ी, सलवार सूट और अन्य पारंपरिक वेशभूषाएं शामिल रहीं। इसके माध्यम से अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहते हुए पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी का संदेश दिया गया।

उद्देश्य साहसिक खेलों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना 

इस पहल का उद्देश्य साहसिक खेलों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना भी रहा, ताकि अधिक से अधिक महिलाएं और युवतियां आत्मविश्वास के साथ ऐसी गतिविधियों में भाग लें और सक्रिय जीवनशैली अपनाएं। राइड के दौरान साइकिल सखी की सदस्यों ने लोगों को यह संदेश दिया कि छोटी दूरी तय करने के लिए हमेशा मोटर वाहनों की आवश्यकता नहीं होती और साइकिल से भी आसानी से दूरी तय की जा सकती है। इसके माध्यम से प्रदूषण कम करने, ईंधन बचाने और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का संदेश दिया गया।

साइकिल सखी की प्रयासों की सराहना 

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सर्वेश उनियाल ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि साइकिल सखी की यह पहल केवल उत्तराखंड ही नहीं बल्कि पूरे देश के लिए एक अभिनव प्रयास है। उन्होंने कहा कि यह पहल समाज को यह संदेश देती है कि पर्यावरण संरक्षण, अपनी संस्कृति और पर्यटन की जिम्मेदारी को किस प्रकार साथ लेकर आगे बढ़ाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि आज की यह राइड केवल एक गतिविधि नहीं, बल्कि एक संदेश है जो पूरे देश तक पहुंचना चाहिए। कार्यक्रम में उपस्थित लक्ष्मण सिंह बिष्ट, जो राजपुर के पूर्व कोतवाल रह चुके हैं, ने कहा कि जब तक महिलाओं को आगे नहीं बढ़ाया जाएगा, तब तक समाज की प्रगति संभव नहीं है।

 

साइकिलिंग से दिनभर मिलती है ऊर्जा

महिला साइकिल सवार जिज्ञासा ने अपना अनुभव साझा करते हुए कहा कि साइकिलिंग से जुड़ने के बाद दैनिक जीवन को व्यवस्थित करना आसान हो गया है। उन्होंने कहा कि सुबह के समय साइकिल चलाने से दिनभर के लिए ऊर्जा मिलती है और सोचने की क्षमता भी बेहतर होती है। पहली बार राइड में शामिल हुई रीना बिष्ट, जो अपनी सात वर्ष की भांजी काव्या भंडारी के साथ आई थीं, ने कहा कि उन्हें पहले नहीं पता था कि साइकिल चलाना इतना आसान और आनंददायक हो सकता है। उन्होंने कहा कि अब वह अधिक साइकिल का उपयोग करेंगी और नियमित राइड में शामिल होंगी। युवा साइकिल सवार बांदिनी ने कहा कि साइकिल कोई भी चला सकता है और साइकिल चलाना स्वतंत्रता जैसा अनुभव देता है। उन्होंने कहा कि अधिक महिलाओं को साइकिलिंग अपनानी चाहिए। कई अन्य प्रतिभागियों ने भी आगे भी साथ मिलकर नियमित रूप से साइकिल चलाने की इच्छा व्यक्त की।

डेकाथलॉन की ओर से दिया गया सहयोग 

इस पहल को डेकाथलॉन देहरादून का भी सहयोग मिला। डेकाथलॉन ने महिला साइकिल सवारों को साइकिलिंग के दौरान उपयोगी गुडीज़ प्रदान कीं। साइकिल सखी द्वारा हर रविवार उद्देश्यपूर्ण साइकिल राइड आयोजित की जाती हैं। महिला दिवस की यह विशेष राइड शहर में साइकिल चलाने की संस्कृति को मजबूत करने और अधिक महिलाओं को साइकिलिंग अपनाने के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से आयोजित की गई थी। कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों ने यह संदेश दिया कि छोटे-छोटे कदमों से बड़ा बदलाव संभव है और छोटी दूरी के लिए साइकिल अपनाने से स्वच्छ वातावरण और स्वस्थ समाज की दिशा में योगदान दिया जा सकता है।