–वर्तमान में वे जीआईसी मरोड़ा टिहरी गढ़वाल में बतौर शिक्षक हैं कार्यरत
देहरादून। उत्तराखंड की धरती से निकले “वृक्षमित्र” डॉ. त्रिलोक चंद्र सोनी आज पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में एक प्रेरणास्रोत बन चुके हैं। बीते 35 वर्षों यानि साढ़े तीन दशक से अधिक समय से वे पर्यावरण संरक्षण, संवर्धन और वृहद पौधारोपण के लिए निरंतर कार्य कर रहे हैं। उनकी पहचान केवल एक शिक्षक या पर्यावरणविद् तक सीमित नहीं, बल्कि वे एक ऐसे जन-आंदोलन के प्रणेता हैं. जिसने लोगों की सोच और जीवनशैली को प्रकृति के प्रति संवेदनशील बनाया है।

डॉ. सोनी ने अतिथियों को फूलों के गुलदस्ते के बजाय पौधे भेंट करने की अनूठी परंपरा शुरू कर समाज को पर्यावरण संरक्षण से सीधे जोड़ा। यही नहीं, विवाह समारोहों में दूल्हा–दुल्हन को शगुन में पौधा भेंट कर उन्होंने हर शुभ अवसर को प्रकृति संरक्षण से जोड़ने का संदेश दिया। वर्तमान में वे राजकीय इंटर कॉलेज मरोड़ा, टिहरी गढ़वाल में शिक्षक के रूप में कार्यरत हैं और शिक्षा के साथ-साथ पर्यावरण जागरूकता को भी विद्यार्थियों और समाज तक पहुंचा रहे हैं।
मथुरा में मिला सम्मान
हाल ही में मथुरा में आयोजित सम्मान समारोह में कोलंबिया पैसिफिक वर्चुअल विश्वविद्यालय की कुलपति डॉ. रश्मि शर्मा ने उन्हें उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित किया। डॉ. शर्मा ने कहा कि डॉ. सोनी और उनकी पत्नी किरन सोनी का संपूर्ण व्यक्तित्व, पहनावा और आचरण पर्यावरण संरक्षण का जीवंत संदेश देता है। उन्होंने उत्तराखंड से लेकर श्रीकृष्ण की जन्मभूमि मथुरा तक लोगों को प्रकृति से जुड़ने की प्रेरणा दी है ।डॉ. त्रिलोक चंद्र सोनी का मानना है कि यह जीवन प्रकृति की अमूल्य देन है और हम सभी का दायित्व है कि धरती पुत्र और पुत्री बनकर प्राकृतिक संसाधनों व वनस्पति का संरक्षण करें। उनका कहना है कि जब तक समाज प्रकृति के साथ सामंजस्य बनाकर नहीं चलेगा, तब तक ग्लोबल वार्मिंग जैसी समस्याओं से निजात पाना संभव नहीं है।
कई बार हो चुके हैं सम्मानित
पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में डॉ. सोनी को अनेक बार सम्मानित किया जा चुका है, लेकिन उनके लिए सबसे बड़ा पुरस्कार समाज में आई वह सकारात्मक सोच है, जो आज पौधारोपण और संरक्षण को अपनी जिम्मेदारी मानने लगी है। “वृक्षमित्र” डॉ. त्रिलोक चंद्र सोनी निस्संदेह पर्यावरण संरक्षण की मशाल थामे हुए आने वाली पीढ़ियों के लिए हरित भविष्य की नींव रख रहे हैं। सीपीवी विश्वविद्यालय की कुलपति डॉ रश्मि शर्मा ने कहा वृक्षमित्र डॉ सोनी व उनकी पत्नी किरन सोनी का पहनावे ही पर्यावरण संरक्षण का संदेश देता है आज उन्होंने उत्तराखंड की भूमि से आकर श्रीकृष्ण की जन्मभूमि मथुरा में भी जन जन को अपने वस्त्रों से पर्यावरण संरक्षण का संदेश देकर लोगो को जागरूक किया। जसपाल सिंह ने कहा उत्तराखंड के जन-जन को जागरूक करने एवं अतिथियों को पौधा भेंट करना तथा दुल्हा दुल्हन को शगुन में पौधा देकर डॉ सोनी ने पर्यावरण की एक नई अलख जगाई है। डॉ त्रिलोक चंद्र सोनी व किरन सोनी ने समारोह के अतिथियों को बद्रीनाथ की तुलसी के पौधे उपहार में भेंट किये। कार्यक्रम में डॉ प्रगना वेदांत, डॉ रेणुका बादना, जितेंद्र कुमार, बेंजीलाल साह, प्रियादत्त आदि मौजूद थे।