–सवाड़ गांव में 7 दिसंबर को आयोजित 18वां अमर सैनिक मेला
-वीर जाम्बाजों को नमन करेगा पूरा सवाड गांव, जानिए क्या है इस गांव की विशेषता

देवाल/थराली। वीरता, बलिदान और मातृभूमि के प्रति अमिट प्रेम की मिसाल बना सवाड़ गांव एक बार फिर इतिहास को याद करने जा रहा है। रविवार को यहां 18वां तीन दिवसीय अमर शहीद सैनिक मेला शुरू होगा, जिसका विधिवत उद्घाटन प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भारी जनसमूह के बीच करेंगे. मुख्यमंत्री के आगमन को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में है। यह मेला सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि उन अमर जवानों को नमन है, जिन्होंने इस मिट्टी को गौरव से भर दिया। इस मौके पर उन जवानों को याद किया जाएगा, जिन्होंने देश की हिफाजत के लिए सब कुछ न्योछावार कर दिया.

इतिहास को जानिए
सैनिक परंपरा से सराबोर सवाड़ गांव का इतिहास किसी सैन्य अभिलेख से कम नहीं। प्रथम विश्व युद्ध (1914-1919) में अकेले इस छोटे से गांव के 22 वीरों ने भाग लिया, किए। द्वितीय विश्व युद्ध (1939-1945) में 38 जवानों ने दुश्मनों से मोर्चा संभाला। आजादी की लड़ाई भी इस गांव ने पूरी शिद्दत से लड़ी यहां के 18 वीर स्वतंत्रता संग्राम में कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहे। पेशावर आज भी गांव की हवाओं में तैरता है। साल 1971 के बांग्लादेश युद्ध में 28 सैनिकों ने हिस्सा लिया, जिनमें से एक जवान ने अपना सर्वोच्च बलिदान दिया।ऑपरेशन ब्लू स्टार में 15 वीर शामिल रहे. जबकि 85 पूर्व सैनिक और 43 वीर नारियां गांव की धरोहर बनकर मौजूद हैं।