देहरादून, कुछ दिन पहले तक पंजाब का मामला सुलझाने वाले हरीश रावत अब खुद उत्तराखंड में उलझन में हैं। स्थिति ये है कि वे कांग्रेस छोड़ेंगे या पार्टी में रहेंगे। फिलहाल विधानसभा चुनाव की घोषणा से ठीक पहले कांग्रेस में चुनावी सेनापति व पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने बड़ा धमाका कर दिया। वे प्रदेश कांग्रेस में चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष भी हैं। हरीश रावत इंटरनेट मीडिया में पोस्ट कर अपनी ही पार्टी को निशाने पर लेते हुए संकेतों में धमकी दे डाली कि इसी तरह का रुख रहा तो वह राजनीति से संन्यास भी ले सकते हैं। इधर, उनके मीडिया सलाहकार व प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष सुरेंद्र अग्रवाल ने पार्टी के प्रदेश प्रभारी देवेंद्र यादव को भाजपा का एजेंट तक कह दिया है।

दरअसल, कांग्रेस नेता हरीश रावत काफी समय से स्वयं को पार्टी का चुनावी चेहरा घोषित करने की मांग उठाते आ रहे हैं, लेकिन कांग्रेस हाईकमान ने इसे अनसुना कर दिया। कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी देवेंद्र यादव समेत अन्य केंद्रीय नेता सामूहिक नेतृत्व में चुनाव लडऩे की बात कहते रहे हैं। हाल ही में कांग्रेस की प्रदेश स्क्रीनिंग कमेटी के अध्यक्ष अविनाश पांडे से इसी बात को रिपीट किया। हरीश रावत के समर्थक पार्टी में हाईकमान के इस रुख से संतुष्ट नहीं है। इसी बीच बुधवार को स्वयं हरीश रावत ने सोशल मीडिया में पोस्ट कर मानो मोर्चा खोल दिया हो।
फेसबुक व ट्विटर पर की गई पोस्ट में रावत ने चुनाव के समय संगठन पर सहयोग के बजाय नकारात्मक भूमिका निभाने का सीधा आरोप मढ़ दिया। इस पोस्ट में उन्होंने किसी का नाम नही लिया , लेकिन इसारा प्रदेश प्रभारी और अन्य केंद्रीय नेताओं के नाम साफ था।
हरीश रावत खुद को सीएम प्रोजेक्ट चाहते हैं
दअरसल, राहुल गांधी की रैली में काफी भीड़ दिखी। उनको लगा कि इस बार चुनाव में लहर कांग्रेस के पक्ष में है। इस लिए वो अभी से वे अपने को सीएम के तौर पर कांग्रेस से प्रोजेक्ट चाहते हैं। वे मानते हैं कि कांग्रेस में उनका मुकाबला कोई नही कर सकता है