*”राष्ट्रपिता महात्मा गांधी एवं लालबहादुर शास्त्री की जयन्ती पर हुए कई कार्यक्रम।
* वन्यजीव सप्ताह के दौरान विपरीत मौसम के बाबजूद पक्षी प्रेमियों के उत्साह में कोई कमी नहीं।
*पक्षियों की विभिन्न प्रजातियों से रूबरू हुए स्टूडेंट्स*
देहरादून, जीआईसी बुरांसखंडा दून में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी एवं लालबहादुर शास्त्री जयन्ती पर कई कार्यक्रम आयोजित किए गए। कोविड SOP के अनुपालन के बीच विद्यालय परिसर की साफ-सफाई के बाद प्रधानाचार्य द्वारा झंडारोहण के साथ ही बापू और शास्त्री के चित्रों पर माल्यार्पण किया गया। जिसमें स्टॉफ व छात्र-छात्राओं ने उत्साहित होकर भाग लिया।
प्रधानाचार्य ने बापू और शास्त्री के जीवन प्रकाश डाला
प्रधानाचार्य एनवी पन्त ने बच्चों को गाँधी जी एवं शास्त्री जी के पर प्रकाश डाला। छात्रों की ओर से सान्वी, आदित्य व संदीप ने देशभक्ति गान से प्रेरणादायक प्रस्तुति दी। इस अवसर पर मतदाता जागरूकता के रूप में शपथ ली गई। जबकि वन्य जीव संरक्षण सप्ताह के तहत वन विभाग व विद्यालय ईको क्लब के तत्वावधान में विद्यालय के सीनियर छात्रों के सहयोग से पक्षियों के संसार को जानने व समझने का प्रयास किया गया। कहते हैं मन में सकारात्मक सोच हो तो हर असम्भव काम भी सम्भव हो जाते हैं। मौसम के विपरीत होने के बाबजूद पक्षी प्रेमियों के उत्साह में कोई कमी नहीं देखी गई। कहते हैं कि *पक्षी पर्यावरण के सबसे संवेदनशील जीव हैं, इनके जरिए वातावरण में अचानक आ रही तब्दीली को भी महसूस किया जा सकता है।* पक्षी गणना हो या फिर उनकी पहचान हमारा मकसद स्कूली बच्चों को वाइल्ड लाइफ के प्रति विशेष रूप से संवेदनशील बनाना है।
छात्र अनुज ने भी अनुभव साझा किया
छात्र अनुज ने पक्षियों की विभिन्न प्रजातियों की वर्तमान स्थिति के बारे में अपने अनुभव साझा किये। बताया, पक्षियों की दुर्लभ प्रजाति को विलुप्ति से बचाने के लिए बच्चों के साथ ही समाज के हर वर्ग को बढ़-चढ़कर आगे आने की आवश्यकता होगी। बच्चों के लिए पर्यावरण संरक्षण व संबर्धन की उपयोगिता को समझते हुए कोटली, बुरांसखंडा एवं आसपास क्षेत्र की पक्षी गणना स्थानीय परिवेश के विद्यालय राजकीय इंटरमीडिएट कॉलेज बुराँसखंडा के बच्चों को दी गई। बच्चे पक्षी समाज की लगभग 20 प्रजातियों की गतिविधियों से रूबरू हुए। कठफोड़वा जैसे इंजीनियर के कारनामे से भी परिचित हुए। उन्होंने देखा कि, जिस प्रकार गाड़ियों के नीचे सॉकर होने से हमें बैठने में आसानी होती है, ठीक उसी तरह कठफोड़वे की चोंच व गर्दन के बीच में भी सॉकर की भाँति संरचना होती है, जिससे कठोर से कठोर पेड़ों में चोंच मारने के बाबजूद कठफोड़वा के मस्तिष्क पर इसका किसी भी प्रकार का प्रतिकूल प्रभाव दिखने को नहीं मिलता, बल्कि वह आसानी से अपना भोजन पेड़ से ग्रहण कर वहाँ अन्य चिड़ियों का आशियाना भी बना देते हैं। छात्रों ने कहा कि इस प्रकार की एक्टिविटी बच्चों को पुस्तकीय ज्ञान से हटकर व्यवहारिक ज्ञान के लिए बहुत ज्यादा उपयोगी साबित होती हैं।* प्रकृति के साथ जुड़ने से हम बहुत कुछ सीखते हैं, यही वजह है जो समाज के प्रति निःस्वार्थ भाव से समर्पण भावना को परिलक्षित करता है। निःसंदेह इस प्रकार की गतिविधियां भविष्य के लिए बहुत उपयोगी साबित होंगी। पक्षी गणना व पहचान विद्यालय स्टॉफ के निर्देशन में स्वयंसेवी सीनियर छात्र अनुज व राहुल के अलावा सान्वी, आयुषी, वंश, प्रियांशी एवं संदीप आदि सम्मिलित हुए।