9वे ग्रेट हिमालयन बर्ड काउंट 2019 का शानदार आगाज

-मौसम के दखल के बाबजूद पक्षी प्रेमियों के उत्साह में कोई कमी नहीं

-आर्क की ओर से स्टूडेंट्स को बर्ड कंजर्वेशन के प्रति दी जा रही जानकारी

Dehradun, एक्शन एंड रिसर्च फॉर कन्जर्वेशन इन हिमालयाज (आर्क) के सौजन्य से चलाए जा रहे “9th ग्रेट हिमालयन बर्ड कॉउंट-2019” के दौरान देश के विभिन्न राज्यों से आये पक्षी-प्रेमियों द्वारा उत्तराखंड के भिन्न-भिन्न क्षेत्रों की जानकारी देकर पक्षियों की स्थिति के बारे में अवगत करवाया गया। कहते हैं मन में सकारात्मक सोच हो तो हर असम्भव काम भी सम्भव हो जाते हैं। मौसम के विपरीत होने के बाबजूद पक्षी प्रेमियों के उत्साह में कोई कमी नहीं देखी गई। उत्तराखंड में पिछले चार दिन से चलाये जा रहे पक्षी गणना से लौटने के उपरांत आर्क संस्था के प्रतीक पँवार ने भ्रमण दल से अपनी बातें साझा करते हुए कहा कि पक्षी पर्यावरण के सबसे संवेदनशील जीव हैं, इनके जरिए वातावरण में अचानक आ रही तब्दीली को भी महसूस किया जा सकता है। पँवार ने बताया कि पक्षी गणना का मकसद प्रोफेशनल बर्ड बायर्स के साथ-साथ स्कूली बच्चों को भी वाइल्ड लाइफ के प्रति विशेष रूप से संवेदनशील बनाना है। पँवार बताते हैं कि अलग-अलग समूहों में निकले पक्षी प्रेमियों ने पक्षियों की विभिन्न प्रजातियों की वर्तमान स्थिति के बारे में दून लौटकर अपने-अपने अनुभव साझा किये। उन्होंने बताया कि भ्रमण दलों द्वारा पक्षी जगत की एकत्र की गई उपयोगी जानकारी, भविष्य के लिए उत्तराखंड राज्य में हिमालय क्षेत्र की बिलुप्त होती जन्तु एवं वनस्पति जगत की बहुमूल्य प्राकृतिक सम्पदाओं के संरक्षण के लिए कामगार सिद्ध होगी। उन्होंने विश्वास जताते हुए कहा कि पक्षियों की दुर्लभ प्रजाति को विलुप्ति से बचाने के लिए समाज के हर वर्ग विशेष रूप से बच्चों को बढ़-चढ़कर सक्रिय रूप से भागीदारी सुनिश्चित करनी की आवश्यकता है, इसके साथ ही सरकार का संरक्षण भी प्राप्त करना होगा।
संस्था के संस्थापक सदस्य प्रतीक पंवार ने अवगत करवाया कि देश के विभिन्न हिस्सों से आये पक्षी गणकों ने प्रदेश के अलग-अलग भागों में पक्षियों की स्थिति व उनकी रहन-सहन की जानकारी प्राप्त की। उन्होंने बताया कि 27 नवंबर से चलाये जा रहे चार दिवसीय इस कार्यक्रम में हर की दून, चकराता, यमनोत्री, चोपता तुंगनाथ, गुप्तकाशी, अगस्तमुनि उखीमठ, धनोल्टी, हरिद्वार- राजाजी पार्क, झिलमिल कण्डवाश्रम, लैंसडाउन, बालगंगा रुड़की आदि क्षेत्रों की स्थलीय जानकारी प्राप्त की।
बच्चों के लिए पर्यावरण संरक्षण व संबर्धन की उपयोगिता को समझते हुए धनोल्टी क्षेत्र की पक्षी गणना स्थानीय परिवेश के ही दो विद्यालयों राजकीय इंटरमीडिएट कॉलेज बुराँसखंडा एवं आवासीय विद्यालय हिमज्योति के बच्चों को दी गई। बच्चे जहाँ पक्षी समाज की लगभग 20 प्रजातियों की गतिविधियों से रूबरू हुए, वहीं दूसरी ओर उन्होंने कद्दूखाल से तीर्थस्थल सुरकण्डा देवी मंदिर रास्ते में प्लास्टिक एकत्र कर पर्यटकों को “स्वच्छता- मिशन” के प्रति जागरूक भी किया।
इस दौरान वे कठफोड़वा जैसे इंजीनियर के कारनामे से भी परिचित हुए। उन्होंने देखा कि, जिस प्रकार गाड़ियों के नीचे सॉकर होने से हमें बैठने में आसानी होती है, ठीक उसी तरह कठफोड़वे की चोंच व गर्दन के बीच में भी सॉकर की भाँति संरचना होती है, जिससे कठोर से कठोर पेड़ों में चोंच मारने के बाबजूद कठफोड़वा के मस्तिष्क पर इसका किसी भी प्रकार का प्रतिकूल प्रभाव दिखने को नहीं मिलता, बल्कि वह आसानी से अपना भोजन पेड़ से ग्रहण कर वहाँ अन्य चिड़ियों का आशियाना भी बना देते हैं।
भ्रमण दल में शरीक शिक्षक कमलेश्वर प्रसाद भट्ट बताते हैं कि इस प्रकार की एक्टिविटी बच्चों को पुस्तकीय ज्ञान से इतर व्यवहारिक ज्ञान के लिए बहुत ज्यादा उपयोगी साबित होती हैं। वे बताते हैं कि ‘स्काउटिंग-गाइडिंग’ के रूप में भी बच्चे प्रकृति से जुड़ना सीखते हैं, जो समाज के प्रति निःस्वार्थ भाव से समर्पण भावना को परिलक्षित करता है, निःसंदेह इस प्रकार की गतिविधियां भविष्य के लिए बहुत उपयोगी साबित होंगी। इस दल में स्वयं आर्क के संस्थापक सदस्य प्रतीक पँवार, वन विभाग से रेंज आफीसर मनमोहन सिंह बिष्ट, शिक्षक कमलेश्वर प्रसाद भट्ट, मेघा पँवार, शोध छात्र वानिकी सौरभ सिंह चौहान, स्वयंसेवी दीना रमोला, गीता सामंत व बबली सजवाण के साथ ही बुराँसखंडा व हिमज्योति के स्वयंसेवी छात्र अनुज, राहुल, विनय, प्रमोद, विपिन, पंकज एवं साक्षी, कंचन, गुँजन, द्रक्षा, ममता, गरिमा, आकांक्षा, मानसी, आस्था व सोना जायत सम्मिलित हुए।