वर्ष 2018 में किया सफर, 8 वर्षों में लाखों कमाने लगी हैं लखपति दीदी

राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) से जुड़कर आत्मनिर्भरता की कामय की सशक्त मिसा

देहरादून। देहरादून जनपद के सहसपुर ब्लॉक की ग्राम पंचायत शंकरपुर निवासी संतोषी सोलंकी ने सीमित संसाधनों के बावजूद राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) से जुड़कर आत्मनिर्भरता की सशक्त मिसाल कायम की है। वर्ष 2018 में स्वयं सहायता समूह से जुड़कर शुरू किया गया उनका यह सफर आज उन्हें ‘लखपति दीदी’ के रूप में स्थापित कर चुका है। वह 26 जनवरी 2026 को नई दिल्ली के कर्तव्य पथ पर आयोजित 77वीं गणतंत्र दिवस परेड में भी पहुंची और संतोषी सोलंकी विशेष अतिथि के रूप में उत्तराखंड का प्रतिनिधित्व किया. दरअसल, भारत सरकार द्वारा देशभर से चयनित महिला स्वयं सहायता समूह सदस्यों, उद्यमियों व विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों में उत्तराखंड से उनका चयन हुआ था.

संतोषी सोलंकी ने सेलाकुई में एनआरएलएम के अंतर्गत एकता स्वयं सहायता समूह से जुड़कर प्रिंटिंग प्रेस व्यवसाय की शुरुआत की।

-आस्था क्लस्टर लेवल फेडरेशन के माध्यम से उन्हें प्रशिक्षण व वित्तीय सहयोग प्राप्त हुआ।

-आज वे सोलंकी प्रिंटिंग प्रेस का सफल संचालन कर रही हैं, जिससे अब तक लगभग 60 लाख रुपये का टर्नओवर और करीब 18 लाख रुपये का वार्षिक लाभ अर्जित किया गया है। 

-सोलंकी प्रिंटिंग प्रेस के माध्यम से बैनर, पोस्टर, विजिटिंग कार्ड, सरकारी योजनाओं की प्रचार सामग्री सहित विभिन्न प्रिंटिंग कार्य किए जा रहे हैं। 

-इस उद्यम से संतोषी सोलंकी ने चार ग्रामीण महिलाओं को रोजगार प्रदान कर उन्हें भी आत्मनिर्भर बनाया है। 

-ब्लॉक लेवल पर स्वयं सहायता समूहों के बैनर और पोस्टर भी यहीं तैयार किए जाते हैं।

-फ्लेक्स मशीन की शुरुआत के बाद टप्परवेयर, इंडिया ग्लाइकोल्स लिमिटेड, हैब फार्मा व हिमालयन जैसी प्रतिष्ठित कंपनियों से नियमित ऑर्डर प्राप्त हो रहे हैं.

-जिला मिशन प्रबंधक सोनम गुप्ता ने बताया कि एनआरएलएम के माध्यम से जनपद की अनेक महिलाएं ‘लखपति दीदी’ बनने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। 

  1. -सीडीओ अभिनव शाह बोले-संतोषी सोलंकी का चयन उत्तराखंड के लिए गर्व का विषय है, ये महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। 

-आज संतोषी सोलंकी की पहचान केवल एक सफल उद्यमी तक सीमित नहीं है, बल्कि वे ग्रामीण महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता, आत्मविश्वास और सशक्तिकरण की प्रेरक प्रतीक बन चुकी हैं।